1857 के शहीदों को नमन
Nov 20th, 2007 by Rajesh Chetan


कविता पाठ करती हुई डा॰ कीर्ति काले। मंच पर बैठे हैं (बाएं से) श्री गजेन्द्र सोलंकी, श्री छैल बिहारी वाजपेयी, श्री कमलेश शर्मा, श्री प्रताप सिंह फौजदार, श्री दिनेश रघुवंशी, श्री कृष्ण मित्र, श्री राजेश चेतन तथा अन्य
गत 24 अक्तूबर 07 की रात दिल्ली में वजीराबाद में यमुना तट पर बना सूर घाट एक ऐसे कार्यक्रम का साक्षी बना जिसमें राष्ट्रभक्ति का भाव पूरी प्रखरता से जगा और देश के वीरों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की गई। 1857 के अमर शहीदों को काव्यमय नमन करने हेतु आयोजित इस कार्यक्रम का नाम था – ‘मत भूलो बलिदान’। इसका आयोजन संस्कार भारती, दिल्ली प्रान्त ने शरद् पूर्णिमा के अवसर पर किया था।
समारोह के प्रारम्भ में लोकसभा में विपक्ष के नेता श्री लालकृष्ण आड़वाणी ने वरिष्ठ कवि श्री छैल बिहारी वाजपेयी को गुरु गोलवलकर काव्य पुरस्कार से सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि श्री छैल बिहारी वाजपेयी पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथी कवि हैं। अटल जी के साथ अनेक काव्य समारोहों में छैल बिहारी जी ने काव्य पाठ किया है।
दिल्ली के पूर्व उप राज्यपाल श्री विजय कपूर की अध्यक्षता में आयोजित इस काव्य-संगम के विशिष्ट अतिथि थे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, उत्तर क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रचारक श्री दिनेश चंद्र एवं दिल्ली प्रान्त संघचालक श्री रमेश प्रकाश। पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री विजय गोयल एवं धर्मयात्रा महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मांगेराम गर्ग विषेश आमंत्रित अतिथि के रूप में उपस्थित थे। समारोह में संस्कार भारती के अखिल भारतीय उपाध्यक्ष श्री दयाप्रकाश सिन्हा, वरिष्ठ कवि श्री कृष्ण मित्र, संस्कार भारती दिल्ली के मार्गदर्शक श्री सन्तोष तनेजा, मंत्री डा॰ विनीता गुप्ता सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।
मुख्य वक्ता के नाते वरिष्ठ साहित्यकार श्री नरेन्द्र कोहली ने रामसेतु तोड़े जाने का तीव्र विरोध करते हुए कहा कि इसके टूटने से हमारी संस्कृति को तो क्षति पहुंचेगी ही, साथ ही साथ हमें सुनामी जैसी समुद्री लहरों की विनाश लीला झेलनी पड़ेगी।
इसके बाद कवयित्री डा॰ कीर्ति काले ने मां सरस्वती की वन्दना-चन्द्र बदन मधुर हसन कमल दल विहारिणी… प्रस्तुत कर काव्य-संगम का शुभारम्भ किया। राजेश चेतन ने 1857 के शहीदों को निम्न पंक्तियों में याद किया –
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जो कर गए शीश दान
यमुना तट कह रहा
मत भूलो उनका बलिदान।
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वरिष्ठ कवि श्री छैल बिहारी वाजपेयी ने देश की वर्तमान समस्याओं के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए यह कविता सुनाई –
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कांग्रेस ने कर डाली
बर्बादी हिन्दुस्थान की
वन्देमातरम् वन्देमातरम् वन्देमातरम्
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इटावा (उ॰ प्र॰) से आए युवा कवि श्री कमलेश शर्मा ने श्रीराम के अस्तित्व को नकारने वालों को इन पंक्तियों में चुनौती दी –
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भारत का कण-कण साक्षी है
जीवन का क्षण-क्षण साक्षी है
तपस्थली जो ॠषि-मुनियों की
कुटियों का पर्ण-पर्ण साक्षी है
जिनके ज्ञान-चक्षु फूटे हैं
उन्हें राम झूठे लगते हैं।
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जाने-माने कवि श्री गजेन्द्र सोलंकी ने बलिदानियों की शहादत को याद रखकर देश को संवारने की बात कही –
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भूलें नहीं भीनी-भीनी माटी की सुगंध को,
भूल मत जाना बलिदानों की कहानी को।
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आगरा के प्रख्यात कवि श्री प्रताप सिंह फौजदार ने हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करने वालों पर इन पंक्तियों में व्यंग्य किया –
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देवी-देवताओं को गाली देना
एक फैशन हो गया है,
देखो अपना प्रजातंत्र कैसे-कैसे हक देता है
जिसके मन में जो आता है, बक देता है।
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मंच संचालन श्री राजेश चेतन ने किया
अरूण कुमार सिंह