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Archive for May, 2008

नगर नोएड़ा लगता कुछ घबराया है
एक पिता ने रिश्ता नहीं निभाया है
निठारी को नहीं भूला हम पाये थे
आरुषि ने फिर से हमें रुलाया है
 

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